कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

हरा चारा

उर्वरक
संकर तथा संकुल किस्मों में 100 किग्रा. नत्रजन तथा 40 किग्रा. फास्फोरस प्रति हे. देना आवश्यक है। नत्रजन की आधी मात्रा तथा फास्फोरस की पूरी मात्रा बुवाई के समय तथा शेष आधी नत्रजन बुवाई के 30 दिन बाद खेत में डालना चाहिए।

खरपतवार नियंत्रण
बुवाई के तुरन्त बाद 1 किग्रा. एट्राजीन 600-700 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें।

सिचाई
आवश्यकतानुसार 12 से 15 दिन के अन्तर पर सिंचाई की जानी चाहिए। फसल को कुल 4-6 सिंचाइयों की आवश्यकता पड़ती है।

कटाई
हरे चारे के लिए उगाई गई फसल की कटाई 50% वाली आने से पहले लगभग 50-55 दिन पर कर लेनी चाहिए।

उपज
अच्छे प्रबन्ध से यह उपज 400-450 कु. हरा चारा प्रति हेक्टेयर हो जाती है।

4. बाजरा

यह एक शीघ्रता से बढने वाली रोग निरोधक तथा अधिक कल्ले फूटने वाली चारे की फसल है। शुष्क एंव अर्द्धशुष्क क्षेत्रों में इसकी बुवाई की जाती है। यह अकेले अथवा लोबिया के साथ बोई जाती हे।

भूमि
बलुई दोमट भूमि इसकी खेती के लिए अच्छी रहती है।

भूमि की तैयारी
पलेवा करके 2-3 जुताईया देशी हल से करके मिट्टी को भुरभूरी बना लेनी चाहिये। तथा पाटा लगाकर खेतों को सममतल कर लेना चाहियें।

उन्नत किस्में
हरे चारे के लिए संकर बाजरा या कम्पोजिट बाजरा, तथा जाइन्ट बाजरा तथा राज-171, नरेन्द्र चारा बाजरा-2, एल-72 तथा एल-74 राजको अच्छी किस्में हैं। संकर बाजरा की दूसरी पीढ़ी का बीज चारे की बुवाई हेतु प्रयोग किया जा सकता है।

बुवाई का समय
बुवाई मार्च के दितीय पक्ष से अप्रैल के प्रथम पक्ष तक की जा सकती है।

बीज दर
शुद्ध फसल के लिए 8-10 किग्रा० बीज प्रति हे० के लिए पर्याप्त होता है। मिलवां फसल में बाजरा तथा लोबिया 2:1 अनुपात (2 लाइन बाजरा तथा एक लाइन लोबिया) में बोना चाहिए इसके लिए 6-7 किग्रा० बाजरा तथा 12-15 किग्रा० लोबिया बीज की आवश्यकता होती है।

बुवाई की विधि
प्रायः इसकी बुवाई छिटकवां की जाती है परन्तु 30-40 सेमी० दूरी पर लाइनों में इसकी बुवाई करना ठीक रहता है। मिलवां खेती में अच्छी पैदावार के लिए बुवाई लाइनों में अलग-अलग करना चाहिए ताकि बीज भूमि में उचित नमी पर पड़ सके।

उर्वरक
बाजरा के लिए 80 किग्रा० नत्रजन, 40 किग्रा० फास्फोरस प्रति हे० देना चाहिए। नत्रजन की आधी मात्रा बुवाई के समय तथा शेष बुवाई 25-30 दिन बाद देना चाहिए।

खरपतवार नियंत्रण
संकर कम्पोजिट बाजरा बोने के तुरन्त बाद 1 किग्रा० एट्राजीन 600 लीटर पानी में घोलकर प्रति हेक्टेयर छिड़काव करें।

सिंचाई
आवश्यकतानुसार फसल को 15-20 दिन के अन्तराल पर पानी देना चाहिए। फसल को कुल 3-4 सिंचाइयों की आवश्यकता होती है।

कटाई
बाजरे को हरे चारे के लिए 50% बाली निकलने पर काटना चाहिए।

उपज
हरे चारे की औसत उपज 400-500 कुन्तल, प्रति हेक्टेयर हो जाती है।