कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

हरा चारा

2. लोबिया

लोबिया प्रोटीन युक्त पौष्टिक हरा चारा है। इसमें 17-18 प्रतिशत प्रोटीन पाई जाती है।

भूमि
इसकी इसकी खेती दोमट, बलुई दोमट और हल्की काली मिट्टी में की जाती है।

भूमि की तैयारी
पलेवा करके एक दो जुताइयां देशी हल से करना चाहिए। हर जुताई के बाद पाटा लगाना आवश्यक है जिससे नमी बनी रहे।

उन्नत किस्मे
रशियन जांइट, कोहिनूर, यू.पी.सी. 5286 तथा इगफ्री 450, बुन्देललोबिया-1. बुन्देललोबिया, 2. यू.पी.सी.-4200, ई.सी. -4216 आई.जी.एफ.आर.आई. -450 उपयुक्त प्रजातियां हैं।

बुवाई का समय
जायद में इसकी बुवाई मार्च से अप्रैल तक की जा सकती है।

बीज दर
एकल फसल के लिए 30-40 किग्रा. बीज प्रति हेक्टर पर्याप्त होता है। यदि इसे मक्का (30-40 किग्रा. प्रति हे.) एवं एम.पी. चरी (20-25 किग्रा. प्रति हे.) के साथ मिलाकर लोबिया (10-15 किग्रा. प्रति हे.) बीज का प्रयोग करना चाहिए।

बुवाई की विधि
बीज की बुवाई लाइनों में 25-30 सेमी. की दूरी पर कूंड में बोयें। लोबिया की बुवाई मिलवां खेती में अलग-अलग लाइनों 2:1 अनुपात में होना चाहिए।

उर्वरक
बुवाई के समय 20 किग्रा. नत्रजन तथा 40 से 60 फास्फोरस प्रति हेक्टर देना चाहिए।

सिंचाई
पहली सिंचाई बुवाई के 15 दिन बाद करना चाहिए, मार्च में बोने पर 4-5 सिंचाइयों की आवश्यकता पड़ती है।

कटाई
फली बनने पर कटाई करनी चाहिए।

उपज
कुल उपज लगभग 300-325 कु.प्रति/हेक्टर उपज प्राप्त होती है।

3. मक्का

मक्का का चारा मुलायम होता है तथा पशु इसे स्वाद से खाते हैं। हरे चारे के लिए इसे 50 प्रतिशत जीरा की अवस्था पर काटें, मक्का में चारे के साथ-साथ शिशु मक्का भी प्राप्त होती है।

भूमि
मक्का की खेती दोमट, बलुई दोमट भूमि में सफलतापूर्वक की जा सकती है। यह ऐसी भूमियां हैं जो न तो अम्लीय हो और न क्षारीय हों, भली प्रकार उगती है।

भूमि की तैयारी
पलेवा करके 1-2 जुताइयां देशी हल से करना चाहिए। हर जुताई के बाद पाटा लगाना आवश्यक है।

उन्नत किस्में
चारे के लिए मक्का की अफ्रीकन टाल, जे 1006 एवं प्रताप चारा-6 प्रजाति सबसे अच्छी है। यदि इन किस्मों का बीज न मिले तो संकर, गंगा-11 या कम्पोजिट मक्का, किसान, विजय भी बो सकते हैं। संकर मक्का के दि्वतीय पीढ़ी के बीज को भी चारे के लिए बोया जा सकता है।

बीज दर
40-50 किग्रा. प्रति हे. बुवाई के लिए पर्याप्त होता है। मक्का के साथ लोबिया की सहफसली खेती करने पर मक्का 30-40 किग्रा. तथा लोबिया 15-20 किग्रा. बीज की आवश्यकता पड़ती है। इससे चारे की पौष्टिकता बढ़ जाती है।

बुवाई की विधि
जायद में मक्का की बुवाई फरवरी के दूसरे पखवारे से प्रारम्भ की जाती है। बुवाई लाइनों में करते हैं जिससे लाइन की दूरी 20-30 सेमी. होनी चाहिए। सहफसली की दशा में मक्का की प्रत्येक तीन पंक्ति के बाद एक पंक्ति लोबिया की उगाना उचित होगा।