कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

इनटीग्रेटेड स्कीम

1. इन्टीग्रेटेड स्कीम- आन एग्रीकल्चर सेन्सस, इकोनॉमिक्स एण्ड स्टैस्टिक्स

    इस योजना के अन्तर्गत प्रदेश में निम्न दो योजनाएं संचालित है।
  1. उ०प्र० में फसलो के क्षेत्रफल एवं उत्पादन सम्बन्धी आंकड़ों की रिपोर्ट तैयार करने की पद्धति को पुर्नसंगठन करने की योजना (टी०आर०एस०)
    1. यह योजना भारत सरकार द्वारा वर्ष 1968-69 से प्रदेश के समस्त जनपदों में चलाई जा रही है।
    2. यह शत प्रतिशत केन्द्र पोषित योजना है।
    3. इस योजना के अन्तर्गत प्रदेश में फसलों की बुआई के तुरन्त बाद उनके अन्तर्गत आच्छादित क्षेत्रफल के अनुमान प्रतिदर्श सर्वेक्षण विधि द्वारा अखिल भारतीय स्तर पर निर्धारित पैटर्न के आधार पर निकाले जाते हैं।
    4. सर्वेक्षण हेतु प्रदेश के कुल 1/5 गाँवों अर्थात लगभग 22000 ग्रामों में प्रत्येक वर्ष खरीफ, रबी व जायद मौसम के लिए अलग - अलग तिथियों में सर्वेक्षण आयोजित कराकर क्षेत्रफल सम्बन्धी विभिन्न सूचनाएं एकत्रित की जाती हैं।
    5. सर्वेक्षण से प्राप्त आंकड़ों को प्रदेशीय मुख्यालय पर कम्प्यूटर द्वारा विश्लेषित कर विभिन्न फसलों के जनपदवार / राज्यस्तरवार सम्पूर्ण क्षेत्रफल सम्बन्धी अनुमान निकाले जाते है।
    6. इन अनुमानों को प्रदेशीय एवं केन्द्रीय शासन को अग्रिम अनुमान हेतु प्रेषित किया जाता है।
      इस योजना के अन्तर्गत कृषकों को कोई सुविधा देय नहीं है।
  2. फसल सांख्यिकी के सुधार की योजना (आई०सी०एस०)
    यह योजना भारत सरकार द्वारा 1974-75 को प्रदेश में संचालित की जा रही है।
    1. इस योजना का मुख्य उद्देश्य केन्द्रीय तथा राज्य सरकार के प्राधिकारियों के संयुक्त प्रयासों से फसल सांख्यिकी संग्रहण प्रणाली की कमियों का पता लगाने के साथ - साथ इन्हें दूर करने के लिए सुधारात्मक उपायों का सुझाव देना है।
    2. योजना कार्य प्रदेश के सांख्यिकी विभाग तथा राष्ट्रीय प्रतिदर्श सर्वेक्षण कार्यालय, भारत सरकार के स्टाफ द्वारा मैचिंग सैम्पुल के निरीक्षण करते हुए सम्पादित किया जाता है।
    3. राज्य प्रतिदर्श के अन्तर्गत क्षेत्रफल परिगणना प्रतिदर्श जांच हेतु खरीफ, रबी, जायद मौसम में 690 गाँवों में पड़ताल के निरीक्षण से किया जाता है।
    4. फसल कटाई प्रतिदर्श जाँच हेतु खरीफ में 670, रबी में 420 व जायद में 40 गांव कटाई स्तर पर निरीक्षण हेतु चयन किये जाते हैं।
    5. तीनों मौसमों में वांछित रिपोर्ट तैयार कर अर्थ एवं संख्या सलाहकार, भारत सरकार को भेजी जाती है।
      इस योजनान्तर्गत कृषकों को कोई सुविधा देय नहीं है।