कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

इतिहास

कृषि विभाग की वर्ष 1875 में स्थापना की गयी। प्रारम्भ में कृषि विभाग का कार्य कृषि सम्बन्धी आँकड़ों के संकलन तथा आदर्श प्रक्षेत्रों की स्थापना तक ही सीमित था। वर्ष 1880 में कृषि विभाग को भू-अभिलेख विभाग से सम्बद्ध कर दिया गया। गवर्नमेन्ट आफ इण्डिया एक्ट-1919 के पारित होने के उपरान्त कृषि क्षेत्र राज्य सरकार के अधीन हो जाने के फलस्वरूप कृषि विभाग को 01 दिसम्बर, 1919 से एक स्वतंत्र विभाग बनाया गया तथा 1 मई, 1920 को इसकी विधिवत् स्थापना हुई। विभाग के तत्कालीन क्रियाकलापों में कृषि क्षेत्र यथा- उपज पालन, भूमि संरक्षण, गन्ना उत्पादन, उद्यान एवं कोलोनाइजेशन सम्बन्धी गतिविधियों का समावेश था। स्वतंत्रता प्राप्ति के पश्चात् गन्ना विभाग के गठन के फलस्वरूप गन्ना उत्पादन सम्बन्धी कार्य नवगठित विभाग में समाहित कर दिया गया। इसी क्रम में कृषि विपणन को भी कृषि विभाग से अलग किया गया है।

कृषि विभाग अपने वर्तमान स्वरूप में विविध संस्थाओं यथा - उ0प्र0 बीज विकास निगम, राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था, यू0पी0 एग्रो, राज्य कृषि प्रबन्ध संस्थान रहमानखेड़ा, उत्तर प्रदेश कृषि अनुसंधान परिषद आदि के सम्मिलित प्रयास से कृषि उत्पादन सम्बन्धी क्रिया-कलापों को गति प्रदान करने में प्रयासरत है।