कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

उर्वरक

नियम अधिनियम

कृषि उत्पादन में उर्वरक की महती भूमिका के दृष्टिगत आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के तहत अन्य आवश्यक वस्तुओं की भाँति उर्वरक को भी आवश्यक वस्तु घोषित किया गया है। इस महत्वपूर्ण कृषि निवेश को आवश्यक वस्तु घोषित किये जाने पर इसका विनिर्माण, भण्डारण, विक्रय एवं उसकी गुणवत्ता सुनिश्चित कराने के मन्तव्य से उर्वरक (नियंत्रण) आदेश बनाया गया, जो प्रथम बार आवश्यक वस्तु अधिनियम-1955 के खण्ड-2 ए की धारा-3 के अन्तर्गत 29/3/1957 को प्रभावी किया गया तथा उसे उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1957 का नाम दिया गया तथा परिचारित भी किया गया। इस आदेश में समय-समय पर आवश्यकतानुसार संशोधन किये जाते रहे है। इस आदेश के संशोधनोपरान्त 25/9/1985 का नाम दिया गया। उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 में जब संशोधन किया गया तब इस आदेश के तहत रसायनिक उर्वरकों का ही विनिर्माण, मूल्य, भण्डारण, विक्रय एवं गुणवत्ता नियंत्रित थी। रसायनिक उर्वरकों के अतिरिक्त वर्तमान दशक में जैव उर्वरकों, कार्बनिक उर्वरकों एवं नान-एडीबल डी-आयल्ड केक उर्वरकों का विनिर्माण, भण्डारण, विक्रय एवं उसकी गुणवत्ता को भी विनियंत्रित किया जाना आवश्यक समझा गया है तथा इन्हे भी आवश्यक वस्तुओं की भाँति मानते हुए उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के तहत आच्छादित किया गया। इस प्रकार रसायनिक उर्वरक, जैव उर्वरक, कार्बनिक उर्वरक एवं नान-एडीबल डी-आयल्ड केक उर्वरक सभी उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 के तहत विनियंत्रित है।

उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 में मुख्यतः निम्न विषयों का समावेश किया गया है।

1 कुल प्राविधानित धारायें 39
2 कुल अनुसूचियाँ 5
3 नियंत्रण विषयक कार्यो के लिये विभिन्न फार्म 19
प्राविधानित धाराये

उर्वरक (नियंत्रण) आदेश, 1985 में कुल 39 धाराओं का समावेश है, जिन्हे सुविधा के लिये 9 वर्गो में रखा गया है।

  • शीर्षक एवं परिभाषायें।
  • मूल्य नियंत्रण।
  • उर्वरको के वितरण पर नियंत्रण।
  • व्यपारियों का पंजीकरण।
  • मिश्रित उर्वरको का निर्माण।
  • उत्पादन विक्री आदि पर नियंत्रण।
  • प्रवर्तन अधिकारी।
  • नमूनो का विश्लेषण।
  • विविध प्राविधान।