कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

गन्ना के रोग

5-विवर्ण रोग ( जून से फसल के अन्त तक)

वर्षाकाल में इस रोग के लक्षण अधिक स्पष्ट होते है। किल्लों की पत्तियाॅ दूधिया सफेद रंग की हो जाती है जो बाद में झाड़ीनुमा थान बना देती है।

पहचान

रोकथाम

  • रोग प्रतिरोधी प्रजातियों का ही प्रयोग करना चाहिए। यदि किसी बीज गन्ने के कटे हुए सिरे अथवा गांठों पर लालिमा दिखे तो ऐसे सेट का प्रयोग नही करना चाहिए।
  • स्वस्थ बीज गन्ना की बुवाई करना चाहिए। जिसका बीज आर्द्र गर्म वायु उपचार (54 से0 ताप पर 2.5 घण्टों तक 99 प्रतिशतआर्द्रता पर) विधि से पूर्वोपचारित किया गया हो।
  • पौधशालाओं के लिए खेत का चयन में समुचित जल निकास की व्यवस्था सुनिश्चित कर लेनी चाहिए। ताकि वर्षा ऋतु में पानी का जमाव न हो सके।
  • ट्राइकोडरमा 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से 75 किग्रा गोबर की खाद में मिलाकर प्रयोग करना चाहिए
  • स्यूडोमोनास फ्लोरिसेन्स 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से 100 किग्रा0 गोबर की खाद में मिलाकर प्रयोग करना चाहिए।