कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

गन्ना के रोग

1-लाल सड़न ( काना रोग) (जुलाई से फसल के अन्त तक)

ऊपर से तीसरी तथा चैथी पत्ती सूखने लगती है साथ ही पत्ती के बीच की मोटी नस में लाल या भूरे रंग के धब्बे पडने लगते है। गन्ने को बीच की चीरने पर गूदा मटमैला लाल दिखाई पड़ता है। जिसमें से सिरके जैसी गंध आती हैं। गन्ने की पिथ में सफेद अथवा भूरी रंग की फफूॅदी भी विकसित हो जाती हैं।

पहचान

रोकथाम

  • रोग प्रतिरोधी प्रजातियों का ही प्रयोग करना चाहिए। यदि किसी बीज गन्ने के कटे हुए सिरे अथवा गांठों पर लालिमा दिखे तो ऐसे सेट का प्रयोग नही करना चाहिए।
  • स्वस्थ बीज गन्ना की बुवाई करना चाहिए। जिसका बीज आर्द्र गर्म वायु उपचार(54 से0 ताप पर 2.5 घण्टों तक 99 प्रतिशतआर्द्रता पर ) विधि से पूर्वोपचारित किया गया हो।
  • पौधशालाओं के लिए खेत के चयन में समुचित जल निकास की व्यवस्था सुनिश्चित कर लेनी चाहिए। ताकि वर्षा ऋतु में पानी का जमाव न हो सके।
  • ट्राइकोडरमा 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से 75 किग्रा0 गोबर की खाद में मिलाकर प्रयोग करना चाहिए
  • स्यूडोमोनास फ्लोरिसेन्स 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से 100 किग्रा0 गोबर की खाद में मिलाकर प्रयोग करना चाहिए ।

2-अगोले की सड़न (जुलाई से सितम्बर तक)

ऊपर की नयी पत्तियाॅ प्रारम्भ में हल्की पीली अथवा सफेद पड़ जाती है जो बाद में सड़ कर नीचे गिर जाती है। यह रोग वर्षाकाल में अधिक लगता है तथा गन्ने की बढवार पर प्रतिकूल प्रभाव डालता है।

पहचान

रोकथाम

  • रोग प्रतिरोधी प्रजातियों का ही प्रयोग करना चाहिए। यदि किसी बीज गन्ने के कटे हुए सिरे अथवा गांठों पर लालिमा दिखे तो ऐसे सेट का प्रयोग नही करना चाहिए।
  • स्वस्थ बीज गन्ना की बुवाई करना चाहिए। जिसका बीज आर्द्र गर्म वायु उपचार(54 से0 ताप पर 2.5 घण्टों तक 99 प्रतिशतआर्द्रता पर ) विधि से पूर्वोपचारित किया गया हो।
  • पौधशालाओं के लिए खेत का चयन में समुचित जल निकास की व्यवस्था सुनिश्चित कर लेनी चाहिए। ताकि वर्षा ऋतु में पानी का जमाव न हो सके।
  • ट्राइकोडरमा 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से 75 किग्रा0 अध सडे गोबर की खाद में मिलाकर प्रयोग करना चाहिए
  • स्यूडोमोनास फ्लोरिसेन्स 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से 100 किग्रा0 अध सडे़ गोबर की खाद में मिलाकर प्रयोग करना चाहिए।