कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

गन्ना के रोग

बढ़वार की अवस्था ( कीट )

(मार्च से जून)

1-अंकुर बेधक

उपोष्ण जलवायु वाले क्षेत्रों में अंकुरण से चार माह तक इसका प्रकोप रहता है। इसके लारवा वृद्धि बिन्दुओं को बेधकर मृत केन्द्र बनाते है जिसमें से सिरके जैसी बदबू आती है।

पहचान

रोकथाम

  • अंकुर बेधक के प्रकोप से ग्रस्त गन्नों को निकाल कर नष्ट कर देना चाहिए।
  • एकीकृत नाशीजीव प्रबन्धन के अन्तर्गत ट्राइकोग्रामा कीलोनिस के 10 कार्ड प्रति हे0 की दर से प्रयोग करना चाहिए अथवा
  • मेटाराइजियम एनिसोप्ली की 2.5 किग्रा0 मात्रा प्रति हे0 की दर से 75 किग्रा0 गोबर की खाद में मिलाकर प्रयोग करना चाहिए।

रसायनिक नियंत्रण

रसायनिक नियंत्रण हेतु निम्नलिखित कीटनाषको में से किसी एक का प्रयोग करना चाहिए।

  • क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 1.5 ली0 प्रति हे0 800-1000 ली0 पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए
  • कार्बोफ्यूरान 3 प्रतिशत सी0जी0 30 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से बुरकाव करना चाहिए अथवा
  • फिप्रोनिल 0.3 प्रतिशत जी0आर0 के 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से अथवा
  • फोरेट 10 प्रतिशत सी0जी0 30 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से बुरकाव करना चाहिए ।

2- चोटी बेधक (टाप सूट बोरर)

(मार्च से सितम्बर)

इसका प्रकोप गन्ने की फसल में बृद्धि की सभी अवस्थाओं में होता है प्रभावित गन्ने में पत्तियाँ सूखकर डेड हार्ट बना देती है तथा गन्ने की मघ्य सिरा में एक लाल धारी सी पड़ जाती है। विकसित गन्ने में झाड़ीनुमा सिरा (बन्ची टाप) बन जाती है।

पहचान

रोकथाम

  • चोटी बेधक के प्रकोप से ग्रस्त गन्ने को निकाल कर नष्ट कर देना चाहिए।
  • मार्च से जुलाई तक 15 दिन के अन्तराल पर ट्राइकोग्रामा कीलोनिस के 10 कार्ड प्रति हे0 की दर से प्रयोग करना चाहिए

रसायनिक नियंत्रण

रसायनिक नियंत्रण हेतु निम्नलिखित कीटनाषको में से किसी एक का प्रयोग करना चाहिए।

  • क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 1.5 ली0 प्रति हे0 800-1000 ली0 पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए
  • कार्बोफ्यूरान 3 प्रतिशत सी0जी0 30 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से बुरकाव करना चाहिए
  • फोरेट 10 प्रतिशत सी0जी0 30 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से बुरकाव करना चाहिए ।