कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

गन्ना के रोग

2- सफेद गिडार

वयस्क(गुबरैले) कीट मानसून की पहली वर्षा के बाद से पत्तियाँ को खाकर क्षति पहुंचाते है। कीट के गिडार सफेद मटमैले रंग की होते है जो पौधे की जड़ को खाकर क्षति पहुंचाते है। फलस्वरूप गन्ने का थान जड़ से सूखकर गिर जाता है।

पहचान

रोकथाम

  • खेत की गहरी जुताई करके फसलों एवं खरपतवारों के अवशेषों को नष्ट कर देना चाहिए।
  • बुवाई समय से तथा पौधों की वांछित दूरी बनाये रखी जानी चाहिए।
  • भूमिशोधनब्यूवेरिया बैसियाना 1.15 प्रतिशत 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से 60-75 किग्रा0 गोबर की खाद में मिलाकर 8-10 दिन रखने के उपरान्त प्रभावित खेत में प्रयोग करना चाहिए।
  • खड़ी फसल में कीट की रोकथाम हेतु मेटाराइजियम एनिसोप्ली 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से 400-500 ली0 पानी में घोलकर सायंकाल छिडकाव करना चाहिए जिसे आवश्यकतानुसार 15 दिन के अन्तराल पर दोहराया जा सकता है।

रसायनिक नियंत्रण

रसायनिक नियंत्रण हेतु निम्नलिखित कीटनाशकों में से किसी एक का प्रयोग वयस्क कीट के नियंत्रण हेतु करना चाहिए।

  • क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 1.5 ली0 प्रति हे0 800-1000 ली0 पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए ।
  • कार्बोफ्यूरान 3 प्रतिशत सी0जी0 25-30 किग्रा0 प्रति हे0 अथवा
  • फेनवलरेट 10 प्रतिशत सी0जी0 25 किग्रा0 की दर से बुरकाव करना चाहिए।

3- जड़ बेधक (रूट बोरर)

इस कीट की सूड़ी का प्रकोप छोटे बड़े दोनों ही पौधोंपर पाया जाता है। सूड़ी जमीन से लगे हुए गन्ने के भाग में छिद्र बनाकर घुस जाती है तथा मृतसार (डेड हार्ट) बनाती है इन मृतसारों से कोई दुर्गन्ध नहीं निकलती है तथा इसे आसानी से निकाला नही जा सकता है।

पहचान

रोकथाम

  • कीट के अण्ड समूहों को इकट्ठा करके तथा प्रभावित तनों को जमीन से काट कर नष्ट कर देना चाहिए।
  • तलहटी वाले खेतों में पेडी की फसल नहीं लेनी चाहिए।

रसायनिक नियंत्रण

रसायनिक नियंत्रण हेतु निम्नलिखित कीटनाशकों में से किसी एक का प्रति हे0 की दर से प्रयोग करना चाहिए।

  • इमिडाक्लोरप्रिड 17.8 एस0एल0 350 मिली0 अथवा
  • क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 2.5 ली प्रति हे0 अथवा
  • फेनवलरेट 0.4 प्रतिशत धूल 25 किग्रा0 की दर से प्रयोग करना चाहिए।