कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

गन्ना के रोग

बुवाई एवं जमाव की अवस्था

(1) सम्पूर्ण उत्तर प्रदेश हेतु
(अ) शीघ्र पकने वाली प्रजातियाँ को0षा0 8436, 88230, 95255 एव को0षा0 96268
(ब) मध्यम देर से पकने वाली प्रजातियाँ को0षा0 767, 8432, 88216, 97264, को0षा0 96275, 95422, को0षा0 99259, यू0पी0 0097
(2)- पूर्वी क्षेत्र हेतु(मध्य जनवरी से फरवरी)
(अ) शीघ्र पकने वाली प्रजातियाँ के साथ-साथ को0से0 95436, को0से0 98321, 00235, 01235
(ब) मध्यम देर से पकने वाली प्रजातियाँ सभी क्षेत्र के लिए स्वीकृत प्रजातियों के साथ-साथ को0से0 95427, 96436 एवं यू0पी0 22
(3)- पूर्वी क्षेत्र हेतु(मध्य जनवरी से फरवरी)
(अ) शीघ्र पकने वाली प्रजातियाँ को0जे0 64,को0से0-00235 एवं 01235
(ब) मध्यम देर से पकने वाली प्रजातियाँ सभी क्षेत्र के लिए स्वीकृत प्रजातियों के साथ-साथ को0षा0 91230, 92263, 96269, यू0पी0 39
(4)- पश्चिमी क्षेत्र हेतु(मध्य फरवरी से मध्य अप्रैल)
(अ) शीघ्र पकने वाली प्रजातियाँ सभी क्षेत्रों की स्वीकृत प्रजातियों के साथ-साथ को0जे0-64
(ब) मध्यम देर से पकने वाली प्रजातियाँ को0षा0 92263, 91230, 94257, 96269 यू0पी0 39, को0पन्त 84212
(5)- जलप्लावित क्षेत्र हेतु
(अ) मध्यम एवं देर से पकने वाली प्रजातियाँ यू0पी0 9530 एवं को0से0 9643

प्रमुख कीट/रोग एवं पहचान

1- दीमक

बोये गये गन्ने के दोनो सिरों से घुस कर अन्दर का मुलायम भाग खाकर उसमें मिट्टी भर देता है। ग्रसित पौधों की बाहरी पत्तियाॅ पहले सूखती है तथा बाद में पूरा गन्ना नष्ट हो जाता है। ऐसे पौधों से दुर्गन्ध नही आती तथा पौधा आसानी से खिचने पर मिट्टी से उखड आता है।

पहचान

रोकथाम

  • बुवाई से पूर्व खेत की गहरी जुताई करनी चाहिए।
  • खेत में कच्चे गोबर का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • फसलों के अवशेषों को नष्ट कर देना चाहिए।
  • नीम की खली 10 कुन्तल प्रति हे0 की दर से बुवाई से पूर्व खेत में मिलाने से दीमक के प्रकोप में कमी आती है।
  • यूवेरिया बैसियाना 1.15 प्रतिशत बायोपेस्टीसाइड 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 60-75 किग्रा0 गोबर की खाद में मिलाकर हल्के पानी का छींटा देकर 8-10 दिन तक छाया में रखने के उपरान्त बुवाई के पूर्व आखिरी जुताई पर भूमि में मिला देने से दीमक का नियंत्रण हो जाता है।

रसायनिक नियंत्रण

रसायनिक नियंत्रण हेतु निम्नलिखित कीटनाशकों में से किसी एक का प्रयोग करना चाहिए।

  • कूड़ों में फेनवलरेट 0.4 प्रतिशतधूल 25 किग्रा0 की दर से बुरकाव करना चाहिए।
  • खड़ी फसल में प्रकोप की स्थित में निम्नलिखित कीटनाशकोंमें से किसी एक का सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करना चाहिए।
  • इमिडाक्लोरप्रिड 17.8 एस0एल0 350 मिली0 अथवा क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशतई0सी0 2.5 ली प्रति हे0 की दर से प्रयोग करना चाहिए।