कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

धान के रोग

बुवाई एवं जमाव की अवस्था-नर्सरी अथवा सीधी बुवाई ( कीट )

(मध्य जून से जुलाई)
(क) शीघ्र पकने वाली प्रजातियाँ (85-110दिन) नरेन्द्र-118, नरेन्द्र-80, नरेन्द्र-1, मनहर, बरानी दीप, रत्ना
(ख) मध्यम देर से पकने वाली प्रजातियाँ (125-135 दिन) नरेन्द्र-359, पन्तधान, मालवीय
(ग) देर से पकने वाली प्रजातियाँ (140-150 दिन) महसूरी
(घ) सुगन्धित धान प्रजातियाँ टाइप-3, नरेन्द्र लालमती, मालवीय सुगंध, पूसा बासमती-1
(ड) ऊसरीली धान प्रजातियाँ ऊसर धान-1, नरेन्द्र ऊसर धान-2, सी0एस0आर0-13
(च) निचले एवं बाढ ग्रस्त क्षेत्र स्वर्णा, एन0डी0आर0-8002, जल प्रिया-जलनिधि

प्रमुख कीट एवं पहचान

1- दीमक

पहचान

रोकथाम

  • गर्मी की गहरी जुताई करें।
  • खेत में कच्चे गोबर का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • फसलों के अवशेषों को नष्ट कर देना चाहिए।
  • नीम की खली 10 कुन्तल प्रति हे0 की दर से बुवाई से पूर्व खेत में मिलाने से दीमक के प्रकोप में कमी आती है।
  • यूवेरिया बैसियाना1.15 प्रतिशत बायोपेस्टीसाइड(जैव कीटनाशी ) की 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 60-75 किग्रा0 गोबर की खाद में मिलाकर हल्के पानी का छींटा देकर 8-10 दिन तक छाया में रखने के उपरान्त बुवाई के पूर्व आखिरी जुताई पर भूमि में मिला देने से दीमक कीटों का नियंत्रण हो जाता है।

रसायनिक नियंत्रण

  • क्लोरोपाइरीफास 20 प्रतिशत ई0सी02.5 ली0 प्रति हे0 की दर से सिंचाई के पानी के साथ प्रयोग करना चाहिये।