कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

मसूर के रोग

1-अर्द्ध कुण्डलीकार कीट (सेमीलूपर कीट)

पहचान

रोकथाम

  • गर्मी में गहरी जुताई करनी चाहिए।
  • समय से बुवाई करें।
  • खेत की निगरानी करते रहना चाहिए। 5 गंधपाश(फेरोमैन ट्रैप) प्रति हे0 की दर से प्रयोग करना चाहिए।

रसायनिक नियंत्रण

रसायनिक नियंत्रण हेतु निम्नलिखित कीटनाशकों में से किसी एक का प्रयोग करना चाहिए।

  • बैसिलस थूरिनजिएन्सिस(बी0टी0) 1.0 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से 400-500 ली0 पानी में घोलकर आवश्यकतानुसार 15 दिन के अन्तराल पर सायंकाल छिडकाव करना चाहिए।
  • फेनवैलरेट 20 प्रतिशत ई0सी0 1.0 ली0 प्रति हे0 की दर से 500-600 ली0 पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए।
  • क्यूनालफास 25 प्रतिशत ई0सी0 2.0 ली0 प्रति हे0 की दर से 500-600 ली0 पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए।
  • मोनोक्रोटोफास 36 प्रतिशत एस0एल0 1.0 ली0 प्रति हे0 की दर से 500-600 ली0 पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए।

विशिष्ट रोग

उकठा रोग का प्रकोप जमाव से लेकर कटाई तक हर अवस्था में हो सकता है।

उकठा रोग

पहचान

रोकथाम

  • बीज शोधन हेतु थीरम 75 प्रतिशत कार्बेण्डाजिम 50 प्रतिशत (2:1) 3 ग्राम प्रति किग्रा0 की दर से बीज शोधित कर बुवाई करना चाहिए।
  • ट्राइकोडरमा 4 ग्राम प्रति किग्रा0 बीज की दर से बीजोपचार कर बुवाई करनी चाहिए।
  • स्यूडोमोनास फ्लोरोसेन्स 0.5 प्रतिशत डब्लू0पी0 10 ग्राम प्रति किग्रा0 बीज की दर से उपचारित करके बोना चाहिए।
  • पी0एस0वी0 कल्चर(राइजोरियम कल्चर) 200 ग्राम प्रति 10 किग्रा0 बीज की दर से बोने से पूर्व सायंकाल उपचारित अवश्य करना चाहिए।
  • भूमि शोधन हेतु 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 ट्राइकोडरमा को लगभग 75 किग्रा0 गोबर की खाद में मिलाकर हल्के पानी का छीटा देकर 8-10 दिन तक छाया में रखने के उपरान्त बुवाई से पूर्व भूमि में मिला देना चाहिए।
  • उकठा अवरोधी प्रजातियाँ जैसे के0डब्ल्यू0 आर0 108, आधार, डी0सी0पी0 92, के0जी0डी0 1168 आदि की बुवाई करनी चाहिए।