कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

मसूर के रोग

1- जड सड़न

पहचान

रोकथाम

  • गर्मी में गहरी जुताई करनी चाहिए।
  • समय से बुवाई करें।
  • भूमि शोधन हेतु विवेरिया बैसियाना 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से 50-60 किग्रा0 अध सडे गोबर में मिलाकर 8-10 दिन रखने के उपरान्त प्रभावित खेत में प्रयोग करना चाहिए।
  • बीज शोधन हेतु थीरम 75 प्रतिशत कार्बेण्डाजिम 50 प्रतिशत + (2:1) 3 ग्राम प्रति किग्रा0 की दर से बीज शोधित कर बुवाई करना चाहिए।
  • ट्राइकोडरमा 4 ग्राम प्रति किग्रा0 बीज की दर से बीजोपचार कर बुवाई करनी चाहिए।
  • पी0एस0वी0 कल्चर(राइजोरियम कल्चर) 200 ग्राम प्रति 10 किग्रा0 बीज की दर से बोने से पूर्व सायंकाल उपचारित अवश्य करना चाहिए।

बढ़वार की अवस्था ( कीट )

(नवम्बर-दिसम्बर)

1-माहू

पहचान

रोकथाम

  • गर्मी में गहरी जुताई करनी चाहिए।
  • समय से बुवाई करें।
  • खेत की निगरानी करते रहना चाहिए। 5 गंधपाश(फेरोमैन ट्रैप) प्रति हे0 की दर से प्रयोग करना चाहिए।

रसायनिक नियंत्रण

रसायनिक नियंत्रण हेतु निम्नलिखित कीटनाशकों में से किसी एक का प्रयोग करना चाहिए।

  • एजाडिरैक्टिन(नीम आयल) 0.15 प्रतिशत ई0सी0 2.5 ली0 प्रति हे0 की दर से 500-600 ली0 पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए।
  • डाइमेथोएट 30 प्रतिशत ई0सी0 1 ली0 प्रति हे0 की दर से 500-600 ली0 पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए।
  • मिथाइल-ओ-डेमेटान 25 प्रतिशत ई0सी0 1 ली0 प्रति हे0 की दर से 500-600 ली0 पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए।
  • मोनोक्रोटोफास 36 एस0एल0 750 मिली0 प्रति हे0 की दर से से 500-600 ली0 पानी में घोलकर छिडकाव करना चाहिए।