कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

चना के रोग

बुवाई एवं जमाव की अवस्था

(क) पूसा 256, के0 डब्ल्यू0 आर0 108, डी0सी0पी0 92, आधार, पूसा 372, उदय, पंत जी0 186 जू(अक्टूबर माह का दूसरा पखवाडा)

1-दीमक

पहचान

रोकथाम

  • खेत में कच्चे गोबर का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • फसलों के अवशेषों को नष्ट कर देना चाहिए।
  • नीम की खली 10 कुन्तल प्रति हे0 की दर से बुवाई से पूर्व खेत में मिलाने से दीमक के प्रकोप में कमी आती है।
  • भूमि शोधन हेतु विवेरिया बैसियाना 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से 50-60 किग्रा0 अध सडे गोबर में मिलाकर 8-10 दिन रखने के उपरान्त प्रभावित खेत में प्रयोग करना चाहिए।
  • खडी फसल में प्रकोप होने पर सिंचाई के पानी के साथ क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 2.5 ली0 प्रति हे0 की दर से प्रयोग करें।

2-कटवर्म (कटुआ कीट)

पहचान

रोकथाम

  • गर्मी में गहरी जुताई एवं समय से बुवाई करें।
  • उचित फसल चक्र अपनाना चाहिए। तथा फसल के अवशेषों को नष्ट कर देना चाहिए।
  • खेत में जगह-जगह सूखी घास के ढेर रख देने से कटुआ कीट की सूडिया उनमें छिप जाती है, जिन्हे प्रातःकाल इकठ्ठा कर नष्ट कर देना चाहिए।
  • खेत की निगरानी करते रहना चाहिए।
  • भूमिशोधन हेतु विवेरिया बैसियाना 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से 50-60 किग्रा0 अध सडे गोबर में मिलाकर 8-10 दिन रखने के उपरान्त प्रभावित खेत में प्रयोग करना चाहिए।
  • मेटाराइजियम एनीसोप्ली 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से 400-500 ली0 पानी में घोल कर सायंकाल छिडकाव करना चाहिए।

रसायनिक नियंत्रण

  • रसायनिक नियंत्रण हेतु क्लोरपायरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 2.5 ली0 500-600 ली0 पानी में घोल बनाकर प्रति हे0 की दर से छिडकाव करना चाहिए।
  • कार्बोफ्यूरान 3 जी 20 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से बुरकाव करना चाहिए।