कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

अरहर के रोग

बुवाई एवं जमाव की अवस्था

(क) अल्प अवधि की प्रजातियाँ (अप्रैल-मई) पारस, यू.पी.ए.एस.120, पूसा 992, टा-21
(ख) दीर्घ अवधि की प्रजातियाँ (125-135 दिन )(जुलाई-अगस्त) बहार, अमर, नरेन्द्र अरहर-1, आजाद, मालवीय, पूसा 9, नरेन्द्र अरहर-2

प्रमुख कीट एवं पहचान

1- दीमक

पहचान

रोकथाम

  • खेत में कच्चे गोबर का प्रयोग नहीं करना चाहिए।
  • फसलों के अवशेषों को नष्ट कर देना चाहिए।
  • नीम की खली 10 कुन्तल प्रति हे0 की दर से बुवाई से पूर्व खेत में मिलाने से दीमक के प्रकोप में कमी आती है।
  • भूमि शोधन हेतु विवेरिया बैसियाना 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से 50-60 किग्रा0 अध सडे गोबर में मिलाकर 8-10 दिन रखने के उपरान्त प्रभावित खेत में प्रयोग करना चाहिए।
  • खडी फसल में प्रकोप होने पर सिंचाई के पानी के साथ क्लोरपाइरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 2.5 ली0 प्रति हे0 की दर से प्रयोग करें।

प्रमुख कीट एवं पहचान

2- सफेद गिडार

पहचान

रोकथाम

  • गर्मी की गहरी जुताई करके फसलों एवं खरपतवारों के अवशेष को नष्ट कर देना चाहिए।
  • समुचित फसल चक्र अपनाना चाहिए।
  • बुवाई समय से तथा पौधों से पौधों की वांछित दूरी बनाये रखी जानी चाहिए।
  • सर्वेक्षण द्वारा नाशीजीव एवं उनके प्राकृतिक शत्रु पर निगाह रखनी चाहिए।
  • नाशीजीव के अण्ड समूह एवं इल्लियों को प्रारम्भिक अवस्था में नष्ट करते रहना चाहिए।

रसायनिक नियंत्रण

रसायनिक नियंत्रण हेतु निम्नलिखित कीटनाशकों में से किसी एक का प्रयोग करना चाहिए।

  • भूमिशोधन हेतु विवेरिया बैसियाना 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से 50-60 किग्रा0 अध सडे गोबर में मिलाकर 8-10 दिन रखने के उपरान्त प्रभावित खेत में प्रयोग करना चाहिए।
  • मेटाराइजियम एनीसोप्ली 2.5 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से 400-500 ली0 पानी में घोल कर सायंकाल छिडकाव करना चाहिए।
  • क्लोरपायरीफास 20 प्रतिशत ई0सी0 2.5 ली0 500-600 ली0 पानी में घोल बनाकर प्रति हे0 की दर से छिडकाव करना चाहिए।
  • कार्बोफ्यूरान 3 जी 20 किग्रा0 प्रति हे0 की दर से बुरकाव करना चाहिए।