कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

कृषि तिलहन

नेशनल मिशन ऑन ऑयल सीड्स एण्ड ऑयल पॉम (N.M.O.O.P.) योजना वर्ष 2016-2017 अन्तर्गत उपर्युक्त कार्यमदों में देय अनुदान का विवरण परिशिष्ट-1 में अंकित है। भारत सरकार द्वारा कार्यक्रम क्रियान्वयन हेतु निर्धारित गाइड लाइन्स एवं प्रदत्त प्रशासनिक अनुमोदन के क्रम में उक्त कार्यमदों का विस्तृत विवरण निन्न प्रकार है-

ब्रीडर बीज क्रय एवं उपयोग

भारत सरकार द्वारा कार्यक्रम अन्र्तगत तिलहन ब्रीडर बीज क्रय कर प्रयोग करने पर क्रय किये गये ब्रीडर बीज के आई0सी0ए0आर0 द्वारा निर्धारित मूल्य का शत्प्रतिशत अनुदान अनुमन्य है, जिसके द्वारा कृषि विश्वविद्यालय एंव राजकीय प्रक्षेत्रों पर अभिजनक बीज(ब्रीडर) बीज का उपयोग कर बीजोत्पादन को बढ़ावा देना है।

आधारीय बीज उत्पादन

प्रदेश में तिलहन के आधारीय बीजों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने के उददेश्य से कार्यक्रम अन्र्तगत भारत सरकार द्वारा आधारीय बीज उत्पादन पर विगत 10 वर्ष तक की अधिसूचित समस्त तिलहनी फसलों रू0 1000/-(रूपये एक हजार मात्र) प्रति कु०0 की दर से एंव विगत 05 वर्षो में अधिसूचित समस्त प्रजाति/हाईब्रिड पर रु0 1100/-(रुपये एक हजार एस सौ मात्र) प्रति कुं0 की दर से अनुदान अनुमन्य है। जिसमें 75 प्रतिशत प्रोत्साहन अनुदान सम्बन्धित कृषक को तथा 25 प्रतिशत अनुदान सम्बन्धित प्रोक्योरिंग एजेन्सी को हैन्डलिंग चार्ज तथा विधायन हेतु अनुमन्य है, आधारीय बीज का उत्पादन अग्राकिंत वर्णित बीज उत्पादक संस्थाओं यथा SDAs/NSC/SFCI/NAFED/ KRIBHCO/IFFCO/HIL/ IFFDC/Central Multi-State Cooperatives such as NCCF.leLr संस्तुत शस्य क्रियाओं को अपनाते हुए प्राविधिक स्टाफ के सतत् पर्यवेक्षण में कराया जायेगा। इस प्रकार आधारीय बीज उत्पादन पर देय उक्त अनुदान का भुगतान उत्पादक संस्थाओं को किया जायेगा। कृषि विभाग अन्र्तगत तिलहनी आधारीय बीज उत्पादन कार्यक्रम संचालन का उत्तरदायित्व अपर कृषि निदेशक(बीज एवं प्रक्षेत्र) का होगा।

प्रमाणित बीज उत्पादन

प्रमाणित बीजों की कमी को पूरा करने हेतु बीज उत्पादक संस्थाओं यथा SDAs/NSC/SFCI/NAFED/ KRIBHCO/IFFCO/HIL/ IFFDC/Central Multi-State Cooperatives such as NCCF. द्वारा उनके पंजीकृत उत्पादकों के क्षेत्रों में प्रमाणित बीजों का उत्पादन किया जायेगा। इसके लिए आवश्यक है कि आधारीय बीज एवं आधारीय बीज स्टेज प्रथम से बोये गये क्षेत्रों/कृषकों का पंजीकरण तथा फसल का प्रमाणीकरण उत्तर प्रदेश राज्य बीज प्रमाणीकरण संस्था से समय से कराना सुनिश्चित कराया जाये तथा बीज ग्राम योजना से संबंधित कृषकों/क्षेत्रों/फसलों की पूर्ण सूची तथा निरीक्षण/प्रमाणीकरण का विस्तृत विवरण संबंधित जनपद के उप कृषि निदेशक को समय से उपलब्ध करा दिया जाये।

प्रमाणित तिलहनी फसलों के बीज उत्पादन हेतु कृषकों को अनुदान सुविधा का प्राविधान है। उत्पादित प्रमाणित बीज के क्रय होने पर विगत 10 वर्ष तक की अधिसूचित समस्त तिलहनी फसलों रू0 1000/-(रूपये एक हजार मात्र) प्रति कुं0 की दर से एंव विगत 05 वर्षो में अधिसूचित समस्त प्रजाति/हाईब्रिड पर रु0 1100/-(रुपये एक हजार एस सौ मात्र) प्रति कुं0 की दर से अनुदान अनुमन्य है। जिसमें 75 प्रतिशत प्रोत्साहन अनुदान सम्बन्धित कृषक को तथा 25 प्रतिशत अनुदान सम्बन्धित प्रोक्योरिंग एजेन्सी को हैन्डलिंग चार्ज तथा विधायन हेतु अनुमन्य है, जिससे उनकी रूचि एवं लाभ सुनिश्चित हो सके।

प्रमाणित बीज वितरण

तिलहन के उत्पादन वृद्धि हेतु आवश्यक निवेशों में से प्रमाणित बीज मुख्य कृषि निवेश है। प्रमाणित बीजों का मूल्य अपेक्षाकृत अधिक होता है। इस तथ्य को दृष्टिगत रखते हुए प्रमाणित बीज अग्राकिंत वर्णित बीज उत्पादक संस्थाओं यथा SDAs/NSC/SFCI/NAFED/ KRIBHCO/IFFCO/HIL/ IFFDC/Central Multi-State Cooperatives such as NCCF. विक्रय केन्द्रों से क्रय करने पर 15 वर्षो में अधिसूचित समस्त प्रजातियों (तिल को छोड़कर) पर मूल्य का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम रू0 2500/-(रूपये दो हजार पांच सौ मात्र) प्रति कुं0 जो भी कम हो तथा 15 वर्षो में अधिसूचित तिल की समस्त प्रजातियों पर मूल्य का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम रू0 5000/-(रूपये पांच हजार मात्र) प्रति कुं0 जो भी कम हो की दर से अनुदान अनुमन्य है। इसीप्रकार 10 वर्षो तक की अधिसूचित समस्त तिलहनी संकर प्रजातियों पर मूल्य का 50 प्रतिशत अथवा अधिकतम रू0 5000/-(रूपये पांच हजार मात्र) प्रति कुं0 जो भी कम हो की दर से अनुदान कृषकों को अनुदान अनुमन्य है।

खण्ड प्रदर्शन

नवीनतम फसल उत्पादन प्रौद्योगिकी का व्यवहारिक ज्ञान कृषकों को सुलभ कराने हेतु उनके खेतों पर खण्ड प्रदर्शनों का आयोजन अति महत्वपूर्ण कार्यमद है। इसके अन्र्तगत फसल उत्पादन तकनीकी के सम्पूर्ण पैकेज का प्रयोग करते हुए प्रदर्शनों का आयोजन किया जायेगा। इन प्रदर्शनों में नियंत्रण प्लाट रखते हुए कृषकों को फसल की उपज क्षमता पर उन्नत फसल उत्पादन तकनीकी का प्रभाव प्रदर्शित किया जायेगा। इन प्रदर्शनों में समस्त संस्तुत शस्य क्रियाओं को अपनाया जाय तथा नवीनतम फसल उत्पादन प्रौद्योगिकी में कृषकों को प्रशिक्षित किया जाय। ऐसे सम्पूर्ण पैकेज युक्त प्रदर्शनों में बुवाई हेतु उपलब्धता के अनुरूप संकर बीजों को प्राथमिकता प्रदान की जाय अन्यथा की स्थिति में मात्र आधारीय अथवा प्रमाणित बीज का ही प्रयोग किया जाय। कृषकों को बीज के अतिरिक्त उर्वरक, जैव उर्वरक, कृषि रक्षा रसायन, सूक्ष्म तत्व आदि कृषि निवेश भी उपलब्ध कराया जाय। प्रत्येक खण्ड प्रदर्शन का आकार 10 हे0 संहत रूप से रहेगा किन्तु प्रतिबन्ध यह रहेगा कि एक फसल हेतु एक कृषक को 01 हे0 का ही प्रर्दशन प्रदान किया जाय। आधारीय बीज के प्रयोग से आयोजित इन खण्ड प्रदर्शनों को बीज उत्पादन हेतु बीज ग्राम योजना से सम्बद्ध किया जाय। इस प्रकार से उत्पादित होने वाले बीज हेतु पंजीकरण प्रमाणीकरण आदि पर होने वाला व्यय कार्यक्रम अन्र्तगत खण्ड प्रदर्शन हेतु अनुमन्य अनुदान धनराशि से वहन किया जायेगा।