कृषि विभाग,

उत्तर प्रदेश

पारदर्शी किसान सेवा योजना,

किसान का अधिकार किसान के द्वार

उपलब्धियाँ

कृषि के क्षेत्र में निरन्तर हो रहे अनुसंधानों से यह संज्ञान में आया कि प्रदेश के मृदा स्वास्थय में निरन्तर गिरावट दर्ज की गयी है। इस समस्या के स्थायी निदान के उपाय स्वरूप जनपद/तहसील स्तर पर मृदा परीक्षण प्रयोगशालाओं को सुदृढ़ करके इसके माध्यम से कृषकों के खेतों की मिट्टी की जाँच करने के उपरान्त संतुलित उर्वरक प्रयोग की संस्तुति प्रदान किये जाने की निरन्तर व्यवस्था सुनिश्चित की गयी। वर्ष 2016-17 से मृदा परीक्षण कार्य नेशनल मिशन फार सस्टेनेबल एग्रीकल्चर योजना के अन्तर्गत मृदा स्वास्थ्य कार्ड कार्यक्रम के अन्तर्गत कराया जा रहा है। वर्ष 2016-17 में चयनित क्षेत्रों से ग्रिड के आधार पर 33.15 लाख मृदा नमूने एकत्रीकरण लक्ष्य के सापेक्ष 34.72 एकत्रित किये गये तथा विश्लेषण उपरान्त 65.90 लाख मृदा स्वास्थ्य कार्ड कृषकों को उपलब्ध कराये गये।

राष्ट्रीय कृषि विकास योजना -
भारत सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में से एक प्रमुख योजना है जिसका मुख्य उद्देश्य कृषि एवं सम्वर्गीय क्षेत्रों में उपलब्ध संसाधन के आधार पर जिला स्तर एवं राज्य स्तर पर कृषि विकास की योजनायें तैयार कर महत्वपूर्ण फसलों के उत्पादन क्षमता एवं उसके वास्तविक उपज के अन्तर को कम करके किसानों की आय में वृ़द्ध करना है। इस योजनान्तर्गत पूर्वी उत्तर प्रदेश में हरित क्रान्ति की योजना, आई0सी0डी0पी0 (चावल एवं गेहूँ) , बुन्देलखण्ड क्षेत्र में खेत तालाब योजना, पश्चिमी उ0प्र0 के जनपदों में फसल विविधीकरण कार्यक्रम, त्वरित चारा विकास कार्यक्रम, पशुपालन, सिंचाई, मत्स्य, उद्यान, गन्ना, डास्प, रेशम, कृषि शोध इत्यादि जैसे महत्वपूर्ण कृषि विकास कार्यक्रमों को प्रदेश की आवश्यकतानुसार संचालित किया जा रहा है।

पूर्वी उत्तर प्रदेश में हरित क्रान्ति -
पूर्वी उत्तर प्रदेश में के विस्तार की उप योजना (राष्ट्रीय कृषि विकास योजना से पोषित) वर्ष 2010-11 से पूर्वी उत्तर प्रदेश में संचालित की जा रही है। योजना का मुख्य उद्देश्य चावल एवं गेहूँ की उत्पादकत में बढ़ोत्तरी, मृदा स्वास्थ्य में सुधार, सिंचाई क्षमता सृजन एवं जल के कुशल उपयोग, कृषि यंत्रीकरण, ऊसर क्षेत्रों में जिप्सम का प्रयोग, सामुदायिक भण्डारण योजना तथा खेती की लागत को कम करने हेतु उन्नत कृषि पद्धति को बढ़ावा दिया जाना है। चयनित जनपदों में फसलों की उत्पादकता में उत्साहवर्धक वृद्धि के ऑकड़े प्राप्त हो रहे हैं।

नेशनल फूड सिक्योरिटी मिशन -
मिशन का प्रमुख उद्देश्य प्रदेश में खाद्य सुरक्षा के दृष्टिगत क्षेत्रफल तथा उत्पादकता वृद्धि को टिकाऊ बनाते हुए खाद्यान्न उत्पादन में वृद्धि करना, भूमि की उर्वरता तथा उत्पादकता को बढ़ाना तथा कृषि प्रक्षेत्रों के स्तर पर लाभकारी परिदृश्य स्थापित करना है। योजनान्तर्गत चावल घटक-23 जनपद, गेहूं घटक-31 जनपद, दलहन घटक-75 जनपद तथा मोटा अनाज में 20 जनपद सम्मिलित किये गये हैं। वर्ष 2015-16 में मिशन के अन्तर्गत वाणिज्यिक फसलें यथा जूट में 5 जनपद, कपास में 4 जनपद, गन्ना में 24 जनपद को भी सम्मिलित किया गया है। योजनान्तर्गत प्रदर्शन बीज, सूक्ष्म पोषक तत्व, कृषि रक्षा रसायन, खरपतवारनाशी, कृषि यंत्र, पम्पसेट एवं स्प्रिंकलर सेट सिंचाई पाइप आदि पर 50 प्रतिशत अनुदान देय है।

नेशनल मिशन ऑन ऑयलसीड एण्ड ऑयलपाम -
पूर्व में संचालित आइसोपाम योजना का पुनर्गठन कर वर्ष 2014-15 से नेशनल मिशन ऑन ऑयलसीड एण्ड ऑयलपाम योजना संचालित की जा रही है। इस योजना के संचालन का मुख्य उद्देश्य तिलहनी फसलों की उत्पादकता में वृद्धि करना तथा प्रदेश को खाद्यान्न तलों में आत्मनिर्भर बनाने का सतत् प्रयास करना है। योजना प्रदेश के समस्त जनपदों में क्रियान्वित है। योजनान्तर्गत विभिन्न कृषि निवेशों पर 50 प्रतिशत अनुदान अनुमन्य है।

नेशनल मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन एण्ड टेक्नालॉजी -
कृषि प्रसार हेतु वर्ष 2013-14 तक आत्मा मॉडल का क्रियान्वयन किया जा रहा था। वर्ष 2014-15 से आत्मा योजना को नेशनल मिशन ऑन एग्रीकल्चर एण्ड टेक्नालॉजी में संविलीन कर दिया गया है। नवीन मिशन के अन्तर्गत चार सब मिशन यथा- सब मिशन ऑन एग्रीकल्चर एक्सटेंशन सब मिशन ऑफ एग्रीकल्चर मैकेनाइजेशन, सब मिशन ऑन सीड एण्ड प्लान्टिंग मैटेरियल एवं स्ट्रेन्थनिंग एण्ड मार्डनाइजेशन आफ पेस्ट मैनेजमेन्ट एप्रोच संचालित किए जा रहे हैं।

नेशनल मिशन फार सस्टेनेबल एग्रीकल्चर -
नेशनल मिशन फॉर सस्टेनेबल एग्रीकल्चर योजना का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इस योजना के अन्तर्गत निम्न मुख्य घटक है।

    अ- रेनफेड एरिया डेवलपमेन्ट (आर0ए0डी0)
    ब- मृदा स्वास्थ्य प्रबंधन (एस0एच0एम0)
    1. स्वायल हेल्थ
    2. स्वायल हेल्थ कार्ड
    3. परम्परागत कृषि विकास योजना (पी0के0वी0वाई)

नेशनल क्राप इन्शोरेन्स प्रोग्राम -
भारत सरकार के दिशा- निर्देशों के अनुरुप राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना एवं मौसम आधारित फसल बीमा योजना को वर्ष 2014-15 में एकीकृत कर नेशनल क्राप इन्शोरेन्स प्रोग्राम का संचालन किया जा रहा है। नेशनल क्राप इन्शोरेन्स प्रोग्राम के घटक के रूप में दो योजनायें हैं -

संशोधित राष्ट्रीय कृषि बीमा योजना / प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना -
प्राकृतिक आपदाओं, रोगों, कृमियों से अधिसूचित क्षेत्र में अधिसूचित फसलों की बुवाई न कर पाने अथवा खड़ी फसल नष्ट होने पर कृषकों को बीमा कवर के रूप में वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है। उक्त सभी जोखिमो हेतु ग्राम पंचायत को बीमा की इकाई के रूप में अधिसूचित किया गया है। ओला, भूस्खलन से क्षति की स्थिति में व्यक्तिगत आधार पर क्षति के आंकलन का प्राविधान है। योजना में फसलों की क्षति का आँकलन मौसम के अंत में बीमा इकाई स्तर पर निर्धारित संख्या में फसल कटाई प्रयोगों से प्राप्त उपज के आधार पर किया जाता है। फसलों की बुवाई न कर पाने/असफल बुवाई की स्थिति में ग्राम पंचायत में आपदा की स्थिति तक उत्पादन लागत में व्यय (बीमित राशि के अधिकतम 25 प्रतिशत तक) के अनुरूप बीमा क्षतिपूर्ति देय होती है। ग्राम पंचायत में प्रतिकूल मौसमीय स्थितियों से अधिसूचित क्षेत्र में अधिसूचित फसल की संभावित उपज सामान्य उपज के 50 प्रतिशत से कम होने की स्थिति, फसल बुवाई के पश्चात मध्य अवस्था तक अधिसूचित क्षेत्र में अधिसूचित फसल लगभग पूर्ण नष्ट होने की स्थिति में तत्काल आंशिक क्षतिपूर्ति देय होती है जिसे मौसम के अंत में फसल कटाई प्रयोगों से प्राप्त उपज के आधार पर आँकलित क्षतिपूर्ति की धनराशि में सम्मिलित किया जाता है। वर्ष 2016-17 खरीफ से यह योजना प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना में समविलीन करते हुए नए रूप में क्रियान्वित की जा रही है।

मौसम आधारित फसल बीमा योजना -
खरीफ में कम व अधिक वर्षा तथा रबी में कम व अधिक तापमान तथा बेमौसम/अधिक वर्षा से अधिसूचित क्षेत्र में अधिसूचित फसल नष्ट होने की सम्भावन के आधार पर कृषकों को बीमा कवर के रूप में वित्तीय सहायत प्रदान की जाती है। बीमित राशि फसल के उत्पादन लागत के बराबर है। योजना को वास्तविक प्रीमियम दर पर लागू किया गया है। वास्तविक प्रीमियम दर बीमित राशि के 2 प्रतिशत से अधिक होने पर निर्धारित दर पर सभी कृषकों को प्रीमियम पर अनुदान अनुमन्य होगा। क्षति का आंकलन बीमा कम्पनियों द्वारा फसल विशेष हेतु प्रास्तावित टर्मशीट में निर्धारित मापदण्डों अनुरूप बीमा इकाई स्तर पर (प्रत्येक ब्लाक में स्थापित मौसम केन्द्र स्तर पर) स्थापित स्वचालित मौसम केन्द्रों से प्राप्त मौसम के प्रतिदिन के आँकड़ों के आधार पर किया जाता है। प्रत्येक ब्लाक में दो स्वचालित मौसम केन्द्र् स्थापित किये जाने का प्राविधान है। योजना में केन्द्र व राज्य सरकार की वित्तीय देयता बराबर -बराबर है जो प्रीमियम पर अनुदान मद तक सीमित है। क्रियान्वयन एजेन्सी के रूप में बीमा कम्पनियों का कार्य क्षेत्र जनपदवार अलग-अलग निर्धारित है।

सोलर फोटो वोल्टिक इरीगेशन पम्प की स्थापना -
वैकल्पिक ऊर्जा स्त्रोतों के अधिकाधिक प्रयोग को बढ़ावा देने, पारम्परिक ऊर्जा स्त्रोतों पर निर्भरता कम करने के साथ-साथ पर्यावरणीय अनुकूलता के दृष्टिगत इस योजना का संचालन किया जा रहा है। योजनान्तर्गत 2 एव 3 एच०पी० के पम्प पर 80 प्रतिशत अनुदान तथा 5 एच०पी० के पम्प पर 55 प्रतिशत अनुदान लघु एवं सीमान्त कृषकों को देय है। 5 एच०पी० के पम्प पर लक्ष्य के 5 प्रतिशत तक बड़े कृषकों को भी अनुदान अनुमन्य है। वर्ष 2016-17 में 6000 सोलर पम्प स्थापना लक्ष्य के सापेक्ष 5458 सोलर पम्प की स्थापना करायी गयी।